पैसों की तंगी दूर करेंगे मां लक्ष्मी के ये 5 उपाय, खुशियों से भर जाएगा घर
महालक्ष्मी को धन की देवी कहा जाता है. पैसों की तंगी हो या बरकत की कमी मां की पूजा से सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं. इसके लिए सबसे पहले घर के किसी हिस्से को साफ कर वहां चौकी की स्थापना करें. लाल कपड़ा बिछाकर उस पर केसर मिले चन्दन से अष्ट दल बनाकर कलश में जल रखें. कलश के पास लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें. मां लक्ष्मी की पूजा के साथ ये उपाय करें.
महालक्ष्मी व्रत के दिन श्रीयंत्र या महालक्ष्मी यंत्र अपने पूजा स्थान पर स्थापित करें और रोज इसकी पूजा करें. किसी लक्ष्मी मंदिर में कमल के फूल अर्पित करें. इससे भी देवी लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेंगी
देवी पुराण के अनुसार यदि आप धन लाभ की इच्छा रखते हों तो महालक्ष्मी का श्रृंगार सोने, चांदी के आभूषणों से करें.
महालक्ष्मी व्रत के दिन देवी लक्ष्मी के साथ साथ भगवान विष्णु की भी पूजा करें. इससे भी धन लाभ के योग बनते हैं
महालक्ष्मी व्रत के दिन दक्षिणावर्ती शंख में गाय का बिना उबला दूध देवी लक्ष्मी की मूर्ती का विधि-विधान से अभिषेक करें.
महालक्ष्मी व्रत के दिन श्रीयंत्र या महालक्ष्मी यंत्र अपने पूजा स्थान पर स्थापित करें और रोज इसकी पूजा करें. किसी लक्ष्मी मंदिर में कमल के फूल अर्पित करें. इससे भी देवी लक्ष्मी की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेंगी
देवी पुराण के अनुसार यदि आप धन लाभ की इच्छा रखते हों तो महालक्ष्मी का श्रृंगार सोने, चांदी के आभूषणों से करें.
महालक्ष्मी व्रत के दिन देवी लक्ष्मी के साथ साथ भगवान विष्णु की भी पूजा करें. इससे भी धन लाभ के योग बनते हैं
महालक्ष्मी व्रत के दिन दक्षिणावर्ती शंख में गाय का बिना उबला दूध देवी लक्ष्मी की मूर्ती का विधि-विधान से अभिषेक करें.
अगर आपके पास पैसा ना टिकता हो करें ये उपाय
अगर धन का अभाव हो या धन आने के बाद भी पास ना टिकता हो तो चिंता होने लगती है. अगर आप भी ऐसी किई परेशानी से गुजर रहे हैं तो चलिए हम आपको धन से जुड़ी समस्या को खत्म करने का एक उपाय बताते हैं.
यह उपाय एक नोट की मदद से किया जाएगा. ध्यान रहे कि आपको इस उपाय लिए केवल और केवल नोट ही चाहिए, किसी भी तरह का सिक्का प्रयोग में ना लाएं. नोट किसी भी राशि का हो सकता है....
उपाय कुछ इस प्रकार है:
किसी भी दिन एक नोट के ऊपर लाल धागा बांध लें और उस नोट को घर के मंदिर में राधा-कृष्ण की मूर्ति के सामने या मूर्ति के पीछे छिपा कर रख दें.
नोट को रखते समय राधा-कृष्ण से यह मनोकामना मांगें कि वह आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार लाएं और आपको खूब धन प्रदान करें.
इस प्रक्रिया को ठीक उसी राशि के नोट के साथ पूरे 41 दिनों तक दोहराना है. ध्यान रहे कि इन 41 दिनों में से एक भी दिन ऐसा नहीं होना चाहिए जब आप यह उपाय करने में असफल हों. यह एक प्रकार की साधना है जिसमें पूरे 41 दिन नोट रखना है और वही मनोकामना मांगनी है.
श्राद्ध शुरू हो रहे हैं 24 सितंबर से, इस बार यह दुर्लभ योग देगा अनंत गुना फल
मेरठ। पितृ पक्ष यानी श्राद्ध प्रतिवर्ष ही लगते हैं लेकिन इस बार लगने वाले श्राद्ध दुर्लभ योग में आ रहे हैं, जिससे इसमें पितरों की पूजा-अर्चना करने का अनंत गुना फल मिलेगा। पंडित कैलाश नाथ द्विवेदी के अनुसार श्राद्ध पक्ष 24 सितम्बर सोमवार से प्रारम्भ होकर आठ अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ सम्पन्न होंगे।
वर्षों बाद बन रहा यो योग
ज्योतिषाचार्य के अनुसार आश्विन कृष्णपक्ष (महालय) तथा कनागत नाम से जाने वाले इस पक्ष को कन्या राशि गत सूर्य में श्रेष्ठ माना जाता है, जो कि इस बार वर्षों बाद बन रहे हैं, यह एक ऐसी अवधारणा है। जिसे सभी धर्म के लोग मानते हैं। यह दुर्लभ योग शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध और तर्पण का अनंत गुना फल देगा। जिससे पितृ प्रसन्न हो जाएंगे।
ये माने जाते हैं पितरों के कारक
ज्योतिष के अनुसार पितरों का कारक माना जाता है सूर्य तथा ननिहाल पक्ष का कारक माना जाता है राहु ये दोनों जब साथ में कुंडली में आ जाएं तब चतुर्थ तथा दशम भाव बैठते हैं। जिससे एक महत्वपूर्ण दोष उत्पन्न होता है और उसे पितृ दोष के नाम से जाना जाता है।
ये ग्रह आ रहे हैं एक साथ
ज्योतिषार्च के अनुसार पहली बार ऐसा योग बना है जब श्राद्ध पक्ष में सूर्य, बुध,राहु उच्च कन्या राशि में एक साथ हैं। जो इस योग में श्राद्ध, तर्पण करेगा उसे यह योग कई गुना शुभ फल देगा।
16 दिन तक रहेगा ग्रहण योग
सूर्य व राहु की युति होने से 16 दिन तक ग्रहण योग का प्रभाव रहेगा। 1977 में भी 28 सितंबर मंगलवार को ऐसा योग बना था। जब पितृ पक्ष की शुरूआत हुई थी। साथ ही उस समय सर्वपितृ अमावस्या पर सूर्यग्रहण का योग भी बना था। 19 साल बाद श्राद्ध पक्ष में सूर्य व राहु की युति से गजछाया योग बन रहा है। इसके पहले 1996 में यह योग बना था। ऐसे योग में पितृकर्म (श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान) करने से उसका अनंत गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इस योग में पितरों के निमित्त श्राद्ध आदि करने से वे पूर्णतरू तृप्त होंगे व श्राद्ध करने वाले को धन-धान्य, पुत्र-पौत्र, सुख-संपत्ति आदि का सुख प्राप्त होगा। इसमें तर्पण श्राद्ध करना उत्तम फल दायक रहेगा इसी दिन अनंत चतुदर्शी भी होने से योग्य विद्वान पंडित से विशेष पूजन,तर्पण, पितृ शांति करवाएं।
पितृ पक्ष 2018
24 सितंबर, सोमवार- पूर्णिमा श्राद्ध
25 सितंबर, मंगलवार- प्रतिपदा श्राद्ध
26 सितंबर, बुधवार- द्वितीय श्राद्ध
27 सितंबर, गुरुवार- तृतीय श्राद्ध
28 सितंबर, शुक्रवार- चतुर्थी श्राद्ध
29 सितंबर, शनिवार- पंचमी श्राद्ध
30 सितंबर, रविवार- षष्ठी श्राद्ध
01 अक्टूबर, सोमवार- सप्तमी श्राद्ध
02 अक्टूबर, मंगलवार- अष्टमी श्राद्ध
03 अक्टूबर, बुधवार- नवमी श्राद्ध
04 अक्टूबर, गुरुवार- दशमी श्राद्ध
05 अक्टूबर, शुक्रवार- एकादशी श्राद्ध
06 अक्टूबर, शनिवार- द्वादशी श्राद्ध
07 अक्टूबर, रविवार- त्रयोदशी श्राद्ध, अनंत चतुर्दशी
08 अक्टूबर, सोमवार- सर्वपितृ अमावस्या
गजब का स्वादिष्ट है ये पोहा, जानें बनाने की विधि
जबलपुर। भारतीय समाज में स्वादिष्ट नाश्ता केवल पेट भरने के लिए नहीं रहा है, बल्कि वह सेहत के लिहाज से भी काफी गुणकारी माना गया है। जबलपुर में सबसे ज्यादा पोहा जलेबी का नाश्ता किया जाता है। गृहणी स्वेता वर्मा के अनुसार घर में पोहा बनाना बहुत आम बात है। मेरे बच्चों को ये बहुत पसंद है। इसमें नए नए प्रयोगों से बच्चे बोरियत भी महसूस नहीं करते और उनकी सेहत भी बनी रहती है। नाश्ते में बनाया गया पोहा हमारे लिए स्वादिष्ट ही नहीं होते, बल्कि हमारी सेहत के लिए भी फायदेमंद होते हैं। तो फिर बनाइए पोहे।
यू बनाएं स्वादिष्ट पोहे
सामग्री- 1 कप पोहा, 1 टेबल स्पून तेल,1/8 टी स्पून हींग, 1 टी स्पून राई, 1/2 कप प्याज बारीक कटा हुआ, 8-10 कढ़ी पत्ता, 2-3 साबुत लाल मिर्च, 1/2 कप आलू बारीक कटा हुआ, 1/2 टी स्पून हल्दी, 2 या स्वाद के अनुसार टी स्पून नमक, 1 टी स्पून हरी मिर्च बारीक कटी हुई, 1 टेबल स्पून नींबू का रस, 1 टेबल स्पून हरा धनिया और नींबू का छिलका (गार्निशिंग के लिए)
पोहा बनाने की विधि-
छननी में पोहा डालकर पानी से साफ कर लें। पोहा को पानी में अधिक समय के लिए न भिगोएं। इसलिए इसे छननी में ही रहने दीजिए। एक पैन में तेल डालें। उसमें हींग, राई, कढ़ी पत्ता, प्याज और साबुत लाल मिर्च डालें। जब प्याज हल्के सुनहरे रंग के हो जाएं, तो इसमें आलू डालें। जब आलू हल्के सुनहरे रंग के हो जाएं, तो फिर इसमें हल्दी डालें। आलू को हल्की आंच पर फ्राई कर लें। गौर करें आलू पूरी तरह पक जाना चाहिए।
अब आंच को तेज करें। उसमें नमक और पोहा डालकर अच्छी तरह मिलाएं। हल्का भूनें।आंच बंद करके इसमें हरी मिर्च, नींबू का रस और आधा हरा धनिया डाल दें। इसे एक कटोरी में निकाल कर ऊपर से बाकी बचा हरा धनिया और नींबू का छिलके से गार्निश कर सर्व करें। हम पोहे में प्याज और मूंगफली डाल सकते हैं। इससे इनमें और चटपटापन आ जाता है। इसके अलावा सर्व करते वक्त पोहे पर अनार के दाने, हरा धनिया और नमकीन डालकर इसे अधिक स्वादिष्ट और सेहत के लिए अधिक फायदेमंद बना सकते हैं। इसके अलावा आप चाहें तो ब्रेड पोहा भी बना सकते हैं।

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